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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन
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श्लोक 181
श्लोक
2.9.181
এই-মত প্রতি-দিন করেন কন্দল
শ্রীধরের জ্ঞান—“বিপ্র পরম চঞ্চল”
एइ-मत प्रति-दिन करेन कन्दल
श्रीधरेर ज्ञान—“विप्र परम चञ्चल”
अनुवाद
इस प्रकार वे दोनों नियमित रूप से एक-दूसरे से झगड़ते रहते थे। श्रीधर भगवान को अत्यंत अशांत ब्राह्मण मानते थे।
Thus, they quarreled regularly. Sridhar considered the Lord to be a very restless brahmana.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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