श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 170
 
 
श्लोक  2.9.170 
ত্রিকচ্ছ বসন শোভে কুটিল কুন্তল
প্রকৃতি, নযন—দুই পরম চঞ্চল
त्रिकच्छ वसन शोभे कुटिल कुन्तल
प्रकृति, नयन—दुइ परम चञ्चल
 
 
अनुवाद
वे तीन स्थानों से बंधी हुई धोती पहने हुए थे, उनके बाल घुंघराले थे, तथा उनका स्वभाव और आंखें दोनों ही चंचल थीं।
 
He wore a dhoti tied at three places, his hair was curly, and both his nature and eyes were playful.
तात्पर्य
प्रभु की दोनों आंखें स्वभाव से बहुत अस्थिर हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)