श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 141
 
 
श्लोक  2.9.141 
তাহাতে যে কিছু হয দিবসে উপায
তার অর্ধ গঙ্গার নৈবেদ্য লাগিঽ যায
ताहाते ये किछु हय दिवसे उपाय
तार अर्ध गङ्गार नैवेद्य लागिऽ याय
 
 
अनुवाद
वह दिन भर में जो भी कमाते थे उसका आधा हिस्सा गंगा की पूजा में अर्पित कर देते थे।
 
Whatever he earned during the day, he used to offer half of it in the worship of Ganga.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)