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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन
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श्लोक 140
श्लोक
2.9.140
এক-বার খোলা-গাছি কিনিযা আনয
খানি খানি করিঽ তাহা কাটিযা বেচয
एक-बार खोला-गाछि किनिया आनय
खानि खानि करिऽ ताहा काटिया वेचय
अनुवाद
वह एक केले का पेड़ खरीदता, उसे टुकड़ों में काटता और फिर उन टुकड़ों को बेच देता।
He would buy a banana tree, cut it into pieces and then sell those pieces.
तात्पर्य
खोला-गाछी मुहावरा पूरे केले के पेड़ को संदर्भित करता है जिसमे तना बरकरार रहता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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