श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  2.9.113 
তবে আমি নৌকা নিযা খেযারির রূপে
গঙ্গায বাহিযা যাই তোমার সমীপে
तबे आमि नौका निया खेयारिर रूपे
गङ्गाय वाहिया याइ तोमार समीपे
 
 
अनुवाद
“उस समय मैं गंगा नदी पार करके नाव पर नाविक के रूप में आपके सामने आया था।
 
“At that time I came before you as a sailor on a boat after crossing the river Ganga.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)