श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  2.9.104 
কোন ভক্ত নাচে, কেহ করে সঙ্কীর্তন
কেহ বলে ঽজয জয শ্রী-শচীনন্দনঽ
कोन भक्त नाचे, केह करे सङ्कीर्तन
केह बले ऽजय जय श्री-शचीनन्दनऽ
 
 
अनुवाद
कुछ भक्त नाच रहे थे, और कुछ सामूहिक कीर्तन में शामिल थे। अन्य लोग "जय, जय, श्रीशचीनंदन!" का जाप कर रहे थे।
 
Some devotees were dancing, and some were engaged in group kirtan. Others were chanting, "Jai, Jai, Shri Sachinandan!"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)