আনন্দ-সাগরে মগ্ন সব-ভক্ত-গণ
বসিযা করেন প্রভু তাম্বূল ভোজন
आनन्द-सागरे मग्न सब-भक्त-गण
वसिया करेन प्रभु ताम्बूल भोजन
अनुवाद
जब भगवान ने बैठकर पान खाया तो सभी भक्त आनंद के सागर में डूब गए।
When the Lord sat down and ate the betel leaf, all the devotees were immersed in the ocean of joy.
तात्पर्य
यदि भगवान के अभिषेक में राजाओं के राजा को शोभा देने वाली वस्तुओं में ताम्बूल जैसा मादक पदार्थ ग्रहण करना देखकर व्यक्ति उनकी नकल करने का प्रयास करता है तो निश्चित रूप से वह अपने अशुभ को ही निमंत्रण देता है। महाजनों द्वारा अनुमोदित शिष्टाचार यह है कि ताम्बूल के बचे भाग को अपने सिर पर स्पर्श करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति प्रसाद के बहाने ताम्बूल ग्रहण करता है, तो निश्चित रूप से विषय-भोगों के लिए उसकी प्रवृत्ति बढ़ जाती है। विशुद्ध वैष्णव प्राकृत-सहजिया बनने के बजाय चतुराई से मादक पदार्थों के साथ अपने शरीर को प्रक्षुब्ध करने से बचते हैं। (श्रीमद् भागवत 1.17.38 पर गौड़ीय भाष्य की टीका देखें)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥