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श्लोक 2.8.91  |
কোন-দিন প্রহ্লাদ-ভাবেতে স্তুতি করে
এই-মত প্রভু ভক্তি-সাগরে বিহরে |
कोन-दिन प्रह्लाद-भावेते स्तुति करे
एइ-मत प्रभु भक्ति-सागरे विहरे |
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| अनुवाद |
| कभी-कभी भगवान प्रह्लाद की भावना से प्रार्थना करते थे। इस प्रकार भगवान निरंतर भक्ति के सागर में तैरते रहते थे। |
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| Sometimes the Lord would pray in the spirit of Prahlada. Thus, the Lord would constantly float in the ocean of devotion. |
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