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श्लोक 2.8.88  |
কোন-দিন গোপী-ভাবে করেন রোদন
কারে বলে ঽরাত্রি-দিনঽ—নাহিক স্মরণ |
कोन-दिन गोपी-भावे करेन रोदन
कारे बले ऽरात्रि-दिनऽ—नाहिक स्मरण |
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| अनुवाद |
| कुछ दिन तो वे गोपी भाव से रोते रहते थे और उन्हें याद ही नहीं रहता था कि दिन है या रात। |
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| For some days he would cry like a Gopi and he would not remember whether it was day or night. |
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