श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 67-68
 
 
श्लोक  2.8.67-68 
পডিলা মূর্ছিত হঞা পৃথিবীর তলে
তিতিল বসন-সব নযনের জলে
অন্ন-ময সর্ব ঘর হৈল তখনে
অপূর্ব দেখিযাশচী বাহ্য নাহি জানে
पडिला मूर्छित हञा पृथिवीर तले
तितिल वसन-सब नयनेर जले
अन्न-मय सर्व घर हैल तखने
अपूर्व देखियाशची बाह्य नाहि जाने
 
 
अनुवाद
वह बेहोश होकर ज़मीन पर गिर पड़ी और उसके सारे कपड़े आँसुओं से भीग गए। पूरे कमरे में चावल बिखर गए। यह अद्भुत दृश्य देखकर शची अपनी सुध-बुध भूल गई।
 
She fell unconscious to the floor, her clothes soaked with tears. Rice scattered all over the room. Seeing this amazing sight, Shachi lost her senses.
तात्पर्य
उसके सारे कपड़े आँसूओं से भीगे हुए हो जाते थे। जब मुक्त आत्माएं परमेश्वर को देखती हैं, तो वे उसकी बाहरी चेतना को खो देती हैं। चूंकि दुर्भाग्यशाली आत्माओं के लिए इस अवस्था को प्राप्त करना असंभव है, इसीलिए भौतिकवादी जीव इस शाश्वत अवस्था को समझने में असमर्थ हैं। भौतिकवादियों के अनुसार, सब कुछ इंद्रिय बोध के माध्यम से प्राप्त ज्ञान के क्षेत्र में है। और चूंकि साधारण लोगों के पास आध्यात्मिक विषयों को समझने के लिए कोई योग्यता नहीं है, इसलिए वे उन पर अपना विश्वास नहीं रख पाते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)