श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  2.8.61 
এই-মত দুই প্রভু করযে ভোজন
সেই ভাব, সেই প্রেম, সেই দুই-জন
एइ-मत दुइ प्रभु करये भोजन
सेइ भाव, सेइ प्रेम, सेइ दुइ-जन
 
 
अनुवाद
इस प्रकार दोनों भगवानों ने एक ही भाव से, एक ही स्नेह से, एक ही व्यक्ति के रूप में अपना भोजन किया।
 
Thus both the Gods ate their food with the same feeling, with the same affection, as one person.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)