श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  2.8.51 
বিশ্বম্ভর বলে,—“মাতা, শুনহ বচন
নিত্যানন্দে আনি ঝাট করাহ ভোজন”
विश्वम्भर बले,—“माता, शुनह वचन
नित्यानन्दे आनि झाट कराह भोजन”
 
 
अनुवाद
विश्वम्भर ने कहा, "हे माता, कृपया मेरी बात सुनिए। हम तुरन्त नित्यानंद को भोजन कराने के लिए यहाँ बुलाएँगे।"
 
Vishvambhara said, "O Mother, please listen to me. We will immediately call Nityananda here to feed him."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)