श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  2.8.47 
আমার ঘরের মূর্তি পরতেক বড
মোর চিত্ত তোমার স্বপ্নেতে হৈল দড
आमार घरेर मूर्ति परतेक बड
मोर चित्त तोमार स्वप्नेते हैल दड
 
 
अनुवाद
“हमारे घर के देवता जीवन से परिपूर्ण हैं, और आपके स्वप्न ने इस तथ्य को मेरे हृदय में दृढ़तापूर्वक स्थापित कर दिया है।
 
“The gods of our house are full of life, and your dream has firmly established this fact in my heart.
तात्पर्य
श्री सचीदेवी के कथन सुनकर महाप्रभु ने कहा, "हमारे घर की रामादि देवाधिदेव प्रत्यक्ष परमेश्वर है । अब तुम्हारे स्वप्न कि बातें सुनकर मेरा भी इस बात मे चित्त स्थिर हो गया" ।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)