श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 250
 
 
श्लोक  2.8.250 
এই মতে নানা-রূপে দেখাযেন ভয
আনন্দে বৈষ্ণব-সব কিছু নাশুনয
एइ मते नाना-रूपे देखायेन भय
आनन्दे वैष्णव-सब किछु नाशुनय
 
 
अनुवाद
यद्यपि भौतिकवादियों ने भक्तों को इस प्रकार धमकाया, किन्तु वैष्णव लोग आनन्द में थे और उन्होंने कुछ भी नहीं सुना।
 
Although the materialists threatened the devotees in this way, the Vaishnavas were in bliss and did not listen to anything.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)