आराध्यो भगवान् व्रजेश-तनयस् तद्-धाम वृन्दावनम्
रम्या काचित् उपासना व्रज-वधू-वर्गेण या कल्पिता
श्रीमद्-भागवतं प्रमाणममलं प्रेमा पुम्-अर्थो महान्
श्री-चैतन्य-महाप्रभोर मतमिदं तत्रादराः नः परः
"ईश्वर के सर्वोच्च व्यक्तित्व को, नंद महाराज के पुत्र के रूप में, उनके पारलौकिक निवास, वृंदावन के साथ पूजा जाना चाहिए। भगवान के लिए पूजा का सबसे सुखद रूप वह है जो वृंदावन की गोपियों द्वारा किया गया था। श्रीमद् भागवतम निर्दोष अधिकार है, और ईश्वर के लिए शुद्ध प्रेम जीवन का अंतिम लक्ष्य है। ये कथन, जिनके लिए हमारे पास सर्वोच्च सम्मान है, श्री चैतन्य महाप्रभु की राय है।"
