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श्लोक 2.8.181  |
ঘন ঘন হুঙ্কারয সর্ব অঙ্গ নডে
না পারে হৈতে স্থির, পৃথিবীতে পডে |
घन घन हुङ्कारय सर्व अङ्ग नडे
ना पारे हैते स्थिर, पृथिवीते पडे |
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| अनुवाद |
| कभी-कभी वे इतनी ज़ोर से दहाड़ते कि उनका पूरा शरीर काँप उठता। फिर स्थिर न रह पाने के कारण वे ज़मीन पर गिर पड़ते। |
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| Sometimes he roared so loudly that his whole body shook. Then, unable to remain still, he fell to the ground. |
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