श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 181
 
 
श्लोक  2.8.181 
ঘন ঘন হুঙ্কারয সর্ব অঙ্গ নডে
না পারে হৈতে স্থির, পৃথিবীতে পডে
घन घन हुङ्कारय सर्व अङ्ग नडे
ना पारे हैते स्थिर, पृथिवीते पडे
 
 
अनुवाद
कभी-कभी वे इतनी ज़ोर से दहाड़ते कि उनका पूरा शरीर काँप उठता। फिर स्थिर न रह पाने के कारण वे ज़मीन पर गिर पड़ते।
 
Sometimes he roared so loudly that his whole body shook. Then, unable to remain still, he fell to the ground.
तात्पर्य
हुँकारए का एक अन्य पाठ हु-हुँकार [जिसका अर्थ "ज़ोर की दहाड़] भी है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)