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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन
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श्लोक 179
श्लोक
2.8.179
চক্রাকৃতি হৈঽ ক্ষণে প্রহরেক ফিরে
আপন চরণ গিযা লাগে নিজ শিরে
चक्राकृति हैऽ क्षणे प्रहरेक फिरे
आपन चरण गिया लागे निज शिरे
अनुवाद
कभी-कभी वे तीन घंटे तक एक चक्र में घूमते रहते थे, और कभी-कभी वे इस तरह नृत्य करते थे कि उनके पैर उनके सिर को छू जाते थे।
Sometimes they would go around in a circle for three hours, and sometimes they would dance in such a way that their feet touched their heads.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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