श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 173
 
 
श्लोक  2.8.173 
ক্ষণে যাঽর গলা ধরিঽ করযে ক্রন্দন
ক্ষণেকে তাহার কান্ধে করে আরোহণ
क्षणे याऽर गला धरिऽ करये क्रन्दन
क्षणेके ताहार कान्धे करे आरोहण
 
 
अनुवाद
कभी वे किसी को गले लगाकर रोते थे, तो दूसरे ही क्षण उसके कंधों पर चढ़ जाते थे।
 
Sometimes he would hug someone and cry, and the next moment he would climb on his shoulders.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)