श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 172
 
 
श्लोक  2.8.172 
ভাবাবেশে এক-বার ধরে যাঽর পায
আর বার পুনঃ তাঽর উঠযে মাথায
भावावेशे एक-बार धरे याऽर पाय
आर बार पुनः ताऽर उठये माथाय
 
 
अनुवाद
परमानंद में वे किसी के पैर पकड़ लेते और फिर उसके सिर पर चढ़ जाते।
 
In ecstasy he would grab someone's legs and then climb on his head.
तात्पर्य
कभी प्रभु भक्त के पैर छूते, तो कभी उस भक्त के सिर पर चढ़ते थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)