श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 163
 
 
श्लोक  2.8.163 
বুঝিযা ইঙ্গিত সব ভাগবত-গণ
লুটযে চরণ-ধুলি অপূর্ব রতন
बुझिया इङ्गित सब भागवत-गण
लुटये चरण-धुलि अपूर्व रतन
 
 
अनुवाद
भगवान का अभिप्राय समझकर सभी भक्तों ने भगवान के चरणकमलों से अद्भुत रत्नमयी धूलि चुरा ली।
 
Understanding the Lord's intention, all the devotees stole the wonderful gem-studded dust from the Lord's lotus feet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)