श्री हरि-वसारा वाक्यांश का अर्थ है "भगवान हरि का दिन"; दूसरे शब्दों में, एकादशी, द्वादशी, या भगवान के प्रकट होने का दिन।
हरि-भक्ति-विलास में कहा गया है कि जो कोई भी श्री हरि-वसारा के दिन उपवास करता है, भगवान हरि को भक्ति के साथ याद करता है, हरि के नामों का जाप करता है, हरि के आनंद के लिए कार्य करता है, अपना मन हरि पर स्थिर रखता है और भौतिक सुखों के प्रति सभी इच्छाओं को त्याग देता है, तो वह निस्संदेह प्रह्लाद की तरह हरि के धाम को प्राप्त कर सकता है। भगवान हरि के भक्तों का कर्तव्य है कि वे चंदन का लेप, फूल, अगरबत्ती, दीपक, उत्तम भोजन, विभिन्न उपहार देकर और जप, अग्नि यज्ञ, परिक्रमा, विभिन्न प्रार्थनाएँ, आनंददायक नृत्य और भजन, वाद्य यंत्र बजाना, नमस्कार करना, "जय!" "और रात में जागते हुए भगवान हरि की महिमा का जाप करते हुए भगवान की महिमा का गुणगान करें।
