श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 8: भगवान की आभूषण का प्रकटन  »  श्लोक 133
 
 
श्लोक  2.8.133 
প্রভুর আনন্দে নৃত্যে নাহি অবসর
রাত্রি-দিনে বেডিঽ গায সব অনুচর
प्रभुर आनन्दे नृत्ये नाहि अवसर
रात्रि-दिने बेडिऽ गाय सब अनुचर
 
 
अनुवाद
भगवान के आनंदमय नृत्य में कोई रुकावट नहीं आई। उनके सभी साथी दिन-रात उनके चारों ओर भजन गाते रहे।
 
Nothing interrupted the Lord's joyous dance. All His companions sang hymns around Him day and night.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)