श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  2.7.50 
গদাধর পণ্ডিত করিলা নমস্কার
বসাইলা আসনে করিযা পুরস্কার
गदाधर पण्डित करिला नमस्कार
वसाइला आसने करिया पुरस्कार
 
 
अनुवाद
गदाधर पंडित ने पुण्डरीक को प्रणाम किया, जिन्होंने उन्हें बैठने के लिए स्थान दिया।
 
Gadadhara Pandita bowed to Pundarika, who offered him a place to sit.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)