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श्लोक 2.7.43  |
যত কিছু তাঙ্র প্রেম-ভক্তির মহত্ত্ব
মুকুন্দ জানেন, আর বাসুদেব দত্ত |
यत किछु ताङ्र प्रेम-भक्तिर महत्त्व
मुकुन्द जानेन, आर वासुदेव दत्त |
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| अनुवाद |
| केवल मुकुंद और वासुदेव दत्त ही उनके परमानंद प्रेम की महिमा जानते थे। |
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| Only Mukunda and Vasudeva Datta knew the glory of his ecstatic love. |
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