| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 2: मध्य-खण्ड » अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन » श्लोक 37 |
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| | | | श्लोक 2.7.37  | অনেক সেবক-সঙ্গে অনেক সম্ভার
অনেক ব্রাহ্মণ-সঙ্গে শিষ্য-ভক্ত তাঙ্র | अनेक सेवक-सङ्गे अनेक सम्भार
अनेक ब्राह्मण-सङ्गे शिष्य-भक्त ताङ्र | | | | | | अनुवाद | | वह अनेक सेवकों, ब्राह्मणों, शिष्यों, भक्तों और साज-सामान के साथ आये। | | | | He came with many servants, brahmins, disciples, devotees and paraphernalia. | | ✨ ai-generated | | |
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