श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.7.27 
এ সকল দেখিযা পাযেন মনে ব্যথা
এতেকে দেখেন গঙ্গা নিশায সর্বথা
ए सकल देखिया पायेन मने व्यथा
एतेके देखेन गङ्गा निशाय सर्वथा
 
 
अनुवाद
"ये सब देखकर उसके मन में पीड़ा होती है। इसीलिए वह रात में गंगा दर्शन करने जाता है।"
 
"Seeing all this pains him. That is why he goes to visit the Ganga at night."
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