| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 2: मध्य-खण्ड » अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन » श्लोक 156 |
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| | | | श्लोक 2.7.156  | পুণ্ডরীক, গদাধর—দুইর মিলন
যে পডে, যে শুনে, তারে মিলে প্রেম-ধন | पुण्डरीक, गदाधर—दुइर मिलन
ये पडे, ये शुने, तारे मिले प्रेम-धन | | | | | | अनुवाद | | जो कोई पुण्डरीक और गदाधर के मिलन के विषय में पढ़ता या सुनता है, उसे प्रेम का धन प्राप्त होता है। | | | | Whoever reads or hears about the union of Pundarika and Gadadhara attains the wealth of love. | | ✨ ai-generated | | |
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