श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 147
 
 
श्लोक  2.7.147 
ক্ষণেকে যে হৈল প্রেম-ভক্তি-আবির্ভাব
তাহা বর্ণিবার পাত্র—ব্যাস মহাভাগ
क्षणेके ये हैल प्रेम-भक्ति-आविर्भाव
ताहा वर्णिबार पात्र—व्यास महाभाग
 
 
अनुवाद
उस समय प्रकट हुए प्रेम और भक्ति का वर्णन करने के लिए केवल परम भाग्यशाली व्यासदेव ही योग्य हैं।
 
Only the most fortunate Vyasadeva is qualified to describe the love and devotion that manifested at that time.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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