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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन
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श्लोक 143
श्लोक
2.7.143
নিদ্রা হৈতে আজি উঠিলাম শুভ-ক্ষণে
দেখিলাম ’প্রেমনিধি’ সাক্ষাত্ নযনে”
निद्रा हैते आजि उठिलाम शुभ-क्षणे
देखिलाम ’प्रेमनिधि’ साक्षात् नयने”
अनुवाद
“आज मैं अत्यंत शुभ मुहूर्त में उठा हूँ, क्योंकि मैंने अपनी आँखों से प्रेमनिधि को प्रत्यक्ष देखा है।”
“Today I have woken up at a very auspicious time, because I have seen the treasure of love with my own eyes.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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