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श्लोक 2.7.134  |
বিদ্যানিধি বক্ষে করি’ শ্রী-গৌরসুন্দর
প্রেম-জলে সিঞ্চিলেন তাঙ্র কলেবর |
विद्यानिधि वक्षे करि’ श्री-गौरसुन्दर
प्रेम-जले सिञ्चिलेन ताङ्र कलेवर |
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| अनुवाद |
| श्री गौरसुन्दर ने विद्यानिधि को अपने वक्षस्थल से लगा लिया और अपने सम्पूर्ण शरीर को प्रेमाश्रुओं से भिगो लिया। |
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| Shri Gaurasundara embraced Vidyanidhi to his chest and drenched his entire body with tears of love. |
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