श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.7.13 
“পুণ্ডরীক আরে মোর বাপরে বন্ধুরে
কবে তোমা দেখিব আরে রে বাপরে”
“पुण्डरीक आरे मोर बापरे बन्धुरे
कबे तोमा देखिब आरे रे बापरे”
 
 
अनुवाद
“हे पुण्डरीक, मेरे पिता, हे मित्र। हे मेरे प्रिय पिता, मैं आपसे कब मिलूँगा।”
 
"Oh Pundrik, my father, Oh friend. Oh my dear father, when will I meet you."
तात्पर्य
व्रज-लीला में पुṇ्डरीक ही श्री राधिकाजी के पिता थे। इसीलिये श्री गौरसुन्दर ने उनको पिता सम्बोधन किया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)