श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 7: गदाधर और पुण्डरीक का मिलन  »  श्लोक 123
 
 
श्लोक  2.7.123 
বিদ্যানিধি মহাশয অলক্ষিত-রূপে
রাত্রি করি’ আইলেন প্রভুর সমীপে
विद्यानिधि महाशय अलक्षित-रूपे
रात्रि करि’ आइलेन प्रभुर समीपे
 
 
अनुवाद
एक रात विद्यानिधि महाशय गुप्त रूप से भगवान के दर्शन करने आये।
 
One night Vidyanidhi Mahashay came secretly to see the Lord.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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