श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.6.7 
হেন-মতে নিত্যানন্দ-সঙ্গে গৌরচন্দ্র
ভক্ত-গণ লৈযা করে সঙ্কীর্তন-রঙ্গ
हेन-मते नित्यानन्द-सङ्गे गौरचन्द्र
भक्त-गण लैया करे सङ्कीर्तन-रङ्ग
 
 
अनुवाद
इस प्रकार गौरचन्द्र ने नित्यानंद की संगति में भक्तों के साथ संकीर्तन लीला का आनन्द लिया।
 
Thus Gaurachandra enjoyed the Sankirtana pastimes with the devotees in the company of Nityananda.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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