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श्लोक 2.6.57  |
গুপ্তে থাকোঙ্ মুঞি নন্দন-আচার্যের ঘরে
’না আইলা বলি’ তুমি করিবা গোচরে” |
गुप्ते थाकोङ् मुञि नन्दन-आचार्येर घरे
’ना आइला बलि’ तुमि करिबा गोचरे” |
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| अनुवाद |
| “मैं गुप्त रूप से नन्दन आचार्य के घर में रहूँगा, किन्तु आप उनसे कह देना कि, ‘वे नहीं आये हैं।’” |
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| “I will stay secretly at Nandan Acharya's house, but you tell him, 'He has not come.'” |
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