श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.6.26 
অদ্বৈতের চরিত্র রামাই ভাল জানে
উত্তর না করে কিছু, হাসে মনে মনে
अद्वैतेर चरित्र रामाइ भाल जाने
उत्तर ना करे किछु, हासे मने मने
 
 
अनुवाद
रामाई अद्वैत की विशेषताओं से पूरी तरह परिचित थे, इसलिए उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया, बल्कि मन ही मन मुस्कुराये।
 
Ramai was fully aware of the characteristics of Advaita, so he did not give any answer, but smiled inwardly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)