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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन
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श्लोक 174
श्लोक
2.6.174
অদ্বৈতের বলে প্রেম পাইল জগতে
এ সকল কথা কহি মধ্য-খণ্ড হৈতে
अद्वैतेर बले प्रेम पाइल जगते
ए सकल कथा कहि मध्य-खण्ड हैते
अनुवाद
अद्वैत प्रभु की कृपा से समस्त जगत को भगवत्प्रेम प्राप्त हुआ। ये सभी लीलाएँ मध्यखण्ड में वर्णित हैं।
By the grace of the Advaita Lord, the entire world attained divine love. All these pastimes are described in the Madhyakhand.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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