"इस संसार के सभी वर्गों के भक्तों और उनकी असाधारण भावनात्मक सेवा को देख कर पापी लोग ईर्ष्या से जल जायें और आत्महत्या कर लें। और मुझे कुत्ते खाने वालों और अन्य भ्रष्ट तथा छोड़ दिए हुए लोगों का उत्साहपूर्ण नृत्य देख कर ईर्षालु घमंडियों का हृदय जलते हुए देख कर प्रसन्नता मिलेगी जो स्वयं को प्रेम-भक्ती के अनुयायी के रूप में पहचानते हैं।" भगवन गौरसुंदर ने अद्वैत के इन कथनों का अनुमोदन किया।
