श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 160
 
 
श्लोक  2.6.160 
অদ্বৈত বলযে,—“আর কি মাগিমু বর?
যে বর চাহিলুঙ্, তাহা পাইলুঙ্ সকল
अद्वैत बलये,—“आर कि मागिमु वर?
ये वर चाहिलुङ्, ताहा पाइलुङ् सकल
 
 
अनुवाद
अद्वैत ने तब कहा, "मैं और क्या माँग सकता हूँ? मुझे जो कुछ चाहिए था, वह मुझे मिल चुका है।"
 
Advaita then said, "What more can I ask for? I have already received everything I wanted."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)