श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 159
 
 
श्लोक  2.6.159 
শুনিযা অদ্বৈত কিছু না করে উত্তর
’মাগ, মাগ’ পুনঃ পুনঃ বলে বিশ্বম্ভর
शुनिया अद्वैत किछु ना करे उत्तर
’माग, माग’ पुनः पुनः बले विश्वम्भर
 
 
अनुवाद
अद्वैत ने कोई उत्तर नहीं दिया, तो विश्वम्भर ने बार-बार कहा, “पूछो। पूछो।”
 
When Advaita did not answer, Vishvambhara repeatedly said, "Ask. Ask."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)