श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 114
 
 
श्लोक  2.6.114 
জয জয সর্ব-প্রাণ-নাথ বিশ্বম্ভর
জয জয গৌরচন্দ্র করুণা-সাগর
जय जय सर्व-प्राण-नाथ विश्वम्भर
जय जय गौरचन्द्र करुणा-सागर
 
 
अनुवाद
समस्त जीवों के प्राण और आत्मा विश्वम्भर की जय हो! दया के सागर गौरचन्द्र की जय हो!
 
Hail Vishvambhar, the life and soul of all beings! Hail Gaurachandra, the ocean of mercy!
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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