श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 111
 
 
श्लोक  2.6.111 
শাস্ত্র-দৃষ্ট্যে পূজা করি’ পটল-বিধানে
এই শ্লোক পডি’ করে দণ্ড-পরণামে
शास्त्र-दृष्ट्ये पूजा करि’ पटल-विधाने
एइ श्लोक पडि’ करे दण्ड-परणामे
 
 
अनुवाद
अद्वैत आचार्य ने शास्त्रों के पंचरात्रिक विधान के अनुसार भगवान की पूजा की। उन्होंने निम्नलिखित श्लोक का पाठ करते हुए उन्हें नमस्कार किया।
 
Advaita Acharya worshipped the Lord according to the Pancharatrika rituals of the scriptures. He offered his obeisances to Him by reciting the following verse.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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