श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 6: अद्वैत आचार्य से भगवान की मिलन  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  2.6.101 
আজি মোর জন্ম-কর্ম সকল সফল
সাক্ষাতে দেখিলুঙ্ তোর চরণ-যুগল
आजि मोर जन्म-कर्म सकल सफल
साक्षाते देखिलुङ् तोर चरण-युगल
 
 
अनुवाद
“आज मेरा जीवन और कार्य सफल हो गए हैं क्योंकि मैंने आपके चरण कमलों के दर्शन कर लिए हैं।
 
“Today my life and work have become successful because I have seen your lotus feet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)