श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  2.5.95 
ভয পাইলেন সব-বৈষ্ণবের গণ
“রক্ষ কৃষ্ণ, রক্ষ কৃষ্ণ”, করেন স্মরণ
भय पाइलेन सब-वैष्णवेर गण
“रक्ष कृष्ण, रक्ष कृष्ण”, करेन स्मरण
 
 
अनुवाद
सभी वैष्णव भयभीत हो गए और प्रार्थना की, "हे कृष्ण, कृपया उनकी रक्षा करें। हे कृष्ण, कृपया उनकी रक्षा करें।"
 
All the Vaishnavas became frightened and prayed, "O Krishna, please protect him. O Krishna, please protect him."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)