श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  2.5.94 
ষড্-ভুজ দেখি’ মূর্ছা পাইলা নিতাই
পডিলা পৃথিবী-তলে—ধাতু-মাত্র নাই
षड्-भुज देखि’ मूर्छा पाइला निताइ
पडिला पृथिवी-तले—धातु-मात्र नाइ
 
 
अनुवाद
जैसे ही निताई ने छह भुजाओं वाले रूप को देखा, वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा और उसमें जीवन के कोई लक्षण नहीं रहे।
 
As soon as Nitai saw the six-armed form, he fell unconscious on the ground and there were no signs of life left in him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)