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श्लोक 2.5.32  |
’বোল, বোল’ বলি’ ডাকে শ্রী-গৌরসুন্দর
সিঞ্চিত আনন্দ-জলে সর্ব-কলেবর |
’बोल, बोल’ बलि’ डाके श्री-गौरसुन्दर
सिञ्चित आनन्द-जले सर्व-कलेवर |
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| अनुवाद |
| श्री गौरसुन्दर ने पुकारा, “जप करो! जप करो!” और उनका पूरा शरीर आनंद के आँसुओं से भीग गया। |
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| Sri Gaurasundara cried out, "Chant! Chant!" and his whole body was drenched with tears of joy. |
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