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श्लोक 2.5.31  |
যে ধরযে ত্রিভুবন, কে ধরিব তারে
মহা-মত্ত দুই প্রভু কীর্তনে বিহরে |
ये धरये त्रिभुवन, के धरिब तारे
महा-मत्त दुइ प्रभु कीर्तने विहरे |
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| अनुवाद |
| जो तीनों लोकों को धारण करता है, उसे कौन धारण कर सकता है? इस प्रकार दोनों भगवान् कीर्तन के आनंद में मग्न हो गए। |
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| Who can hold Him who holds the three worlds? Thus both the Lords became immersed in the bliss of chanting. |
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