श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.5.27 
স্বানুভাবানন্দে নাচে প্রভু দুই-জন
ক্ষণে কোলাকুলি করি’ করযে ক্রন্দন
स्वानुभावानन्दे नाचे प्रभु दुइ-जन
क्षणे कोलाकुलि करि’ करये क्रन्दन
 
 
अनुवाद
जब दोनों भगवान अपने-अपने आनंद में नाच रहे थे, तो कभी एक-दूसरे को गले लगाकर रो रहे थे।
 
While both the gods were dancing in their own joy, sometimes they were crying while hugging each other.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)