vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन
»
श्लोक 170
श्लोक
2.5.170
এ সব কৌতুক যত শ্রীবাসের ঘরে
এতেকে শ্রীবাস-ভাগ্য কে বলিতে পারে
ए सब कौतुक यत श्रीवासेर घरे
एतेके श्रीवास-भाग्य के बलिते पारे
अनुवाद
ये सभी अद्भुत लीलाएँ श्रीवास के घर पर घटित हुईं। अतः श्रीवास के सौभाग्य का वर्णन कौन कर सकता है?
All these wonderful pastimes occurred in the home of Srivasa. So who can describe Srivasa's good fortune?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×