श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.5.17 
বিশ্বম্ভর বলে,—“শুন শ্রীপাদ গোসাই
শুভ কর, সবে পণ্ডিতের ঘর যাই”
विश्वम्भर बले,—“शुन श्रीपाद गोसाइ
शुभ कर, सबे पण्डितेर घर याइ”
 
 
अनुवाद
विश्वम्भर बोले, "हे श्रीपाद गोसांई, कृपया सुनिए। आपके आशीर्वाद से हम सब श्रीवास पंडित के घर जाएँगे।"
 
Vishvambhar said, "O Sripad Gosain, please listen. With your blessings, we will all go to Srivas Pandit's house."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)