श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 5: नित्यानंद की व्यास-पूजा समारोह और उनका भगवान के षड्भुज रूप का दर्शन  »  श्लोक 142
 
 
श्लोक  2.5.142 
সর্ব-ভূতে আছেন শ্রী-বিষ্ণু না জানিযা
বিষ্ণু-পূজা করে অতি প্রাকৃত হৈযা
सर्व-भूते आछेन श्री-विष्णु ना जानिया
विष्णु-पूजा करे अति प्राकृत हैया
 
 
अनुवाद
जो लोग यह नहीं जानते कि भगवान विष्णु प्रत्येक जीव के हृदय में विद्यमान हैं, उनकी पूजा निःसंदेह भौतिकवादी है।
 
The worship of those who do not know that Lord Vishnu is present in the heart of every living being is undoubtedly materialistic.
तात्पर्य
वस्तुगत इन्द्रियों के माध्यम से की गई गतिविधियाँ जो सशर्त जीवों द्वारा अपने परिणामों का आनंद लेने की इच्छा रखते हैं, को प्राकृत या भौतिकवादी कहा जाता है। जो लोग मानते हैं कि परमात्मा, भगवान विष्णु, स्थूल और सूक्ष्म पदार्थ के प्रत्येक परमाणु के भीतर मौजूद नहीं हैं और मानते हैं कि वह सभी जीवित संस्थाओं के दिलों में मौजूद नहीं हैं - ऐसे व्यक्तियों की विष्णु की पूजा केवल धोखा और भौतिकवादी गुंडागर्दी है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)